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भारत सरकार
सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises

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सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (सूलमउ मंत्रालय) जीवंत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर विचार करता है। हम खादी, ग्राम और कयर उद्योग सहित सूलमउ क्षेत्र की वृद्धि एवं विकास को बढ़ावा देते हैं। इसे संबंधित मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों तथा अन्य स्टेकहोल्डरों के सहयोग से किया जाता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संबंधी अधिनियम, नियम एवं रिपोर्ट

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा इस क्षेत्र की कवरेज और निवेश सीमा को प्रभावित करने वाले नीतिगत मुद्दों के समाधान हेतु वर्ष 2006 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम अधिसूचित किया गया।

योजना और बजट

सूलमउ पर योजना और बजट योजना में क्षेत्र के विकास से संबंधित सूलमउ क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं का पता लगाया जाता है। इन्हेंे क्षेत्र के रणनीतिक उपाय करते समय विषय (थीम) आधारित ध्यान देने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण शीर्षों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है।

समाचार नया क्या् है

प्रेस सम्मेलन ( 01/06/2016 ) ( अंग्रेजी / हिंदी)

• सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए कार्यनिष्पादन और क्रेडिट रेटिंग स्कीम के संशोधित दिशा-निर्देश ( पीडीएफ / डॉक)

• सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पुनर्वास के ढाँचे के लिए आरबीआई परिपत्र

प्रेस बैठक ( हिंदी / अंग्रेजी)

ग्लोबल क्लीनटेक नवप्रवर्तन कार्यक्रम - भारत से क्लीनोवेटर्स उत्कृष्ट परियोजनाएं

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय एस्पायर स्कीम के अंतर्गत आजीविका व्यवसाय इंक्यूबेटरों और प्रौद्योगिकी व्यवसाय इंक्यूबेटरों की स्थापना के लिए नए आवेदन मांगता है। इच्छुक संस्थान/केन्द्र दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

एक झलक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम 2016

• स्टार्ट-अप इंडिया कार्य योजना 16 जनवरी, 2016

परंपरागत उद्योगों के पुनर्सृजन के लिए निधि स्कीम (स्फूर्ति)के लिए संशोधित दिशा-निर्देश

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) का पुनर्गठन (26/10/2015) (26/10/2015) ( अंग्रेजी / हिंदी)

उद्योग आधार लघु फिल्म

उद्योग आधार अधिसूचना (हिंदी/अंग्रेजी)

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए उद्योग आधार

नई स्फूर्ति अगस्त, 2014

• नवप्रवर्तन, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता संवर्धन स्कीम (एस्पायर)

सूलमउ स्कीमें

उद्यमियों, विशेषकर लघु व्यवसायियों की मद्द एवं सहायता के लिए बहुत सी स्कीमें एवं कार्यक्रम हैं। इसके अलावा, विभिन्न अन्य मंत्रालय भी सूलमउ क्षेत्र के अभियान का समर्थन करते आ रहे हैं।

सूलमउ-उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम

स्कीमों में नई संस्थाओं की स्थापना (ईडीआई), विद्यमान ईडीआई की अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण तथा उद्यमिता एवं कौशल कार्यकलापों की सहायता के लिए वित्तीय सहायता पर विचार किया जाता है।

समाचार और कार्यक्रम

मंत्रालय द्वारा सभी कार्यक्रमों, स्कीमों एवं आयोजनों की जागरूकता सामाजिक मीडिया सहित प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से की जाती है। इस मंत्रालय के नियंत्रणाधीन सभी संबद्ध तथा अधीनस्थ कार्यालय, स्वायत्तशासी संस्थान एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी समाचार एवं कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचार में लगे हुए हैं।

पीएमईजीपी - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

पीएमईजीपी सूक्ष्म क्षेत्र के उच्चतर ऋण प्रवाह के लिए वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी सुसाध्य बनाने के लिए एक ऋण संबद्ध स्कीम है। इसका उद्देश्यल देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सतत एवं संपोषणीय रोजगार के अवसर सृजित करना है।

विकास आयुक्त कार्यालय

विकास आयुक्त (सूलमउ) की स्थापना 1954 में की गयी थी तथा वर्षों से लघु उद्योग क्षेत्र के समर्थन, पथप्रदर्शन तथा सुसाध्यता के लिए एक एजेंसी के रूप में अपनी भूमिका निभाते देखा गया है। इसके अपने प्रबंध के अंतर्गत 70 से अधिक क्षेत्रीय कार्यालय एवं 21 स्वायत्तशासी निकाय (औजार कक्ष, प्रशिक्षण संस्थान तथा परियोजना सह प्रक्रिया विकास क्लस्टर) हैं।

केवीआईसी-खादी और ग्रामोद्योग आयोग

केवीआईसी महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों पर ध्यान देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सृजन के उद्देश्यर से संसद के एक अधिनियम (1956 का संख्या 61) 1987 के यथासंशोधित अधिनियम सं.12 तथा 2006 की अधिनियम सं 10) द्वारा गठित एक सांविधिक निकाय है।
"खादी वस्त्र नहीं विचार है "

कयर बोर्ड

भारत सरकार द्वारा कयर उद्योग अधिनियम, 1953 के अंतर्गत गठित कयर बोर्ड अनुसंधान तथा विकास, गुणवत्ता सुधार, आधुनिकीकरण तथा प्रशिक्षण, बाजार संवर्धन के माध्यम से कयर उद्योग के संपोषणीय विकास तथा कयर उद्योग में नियोजित सभी व्यक्तियों के कल्याण में लगा हुआ है।

एनएसआईसी

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के नियंत्रणाधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम का मिषन देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सवंर्धित करना, सहायता करना एवं प्रोत्साहित करना है। एनएसआईसी देषव्यापी कार्यालयों एवं तकनीकी केन्द्रों के माध्यम से प्रचालन करता है। यह विपणन सहायता, ऋण सहायता, प्रौद्योगिकी सहायता एवं अन्य सहायता सेवाओं के लिए सेवा पैकेज देता है।

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे)

राष्ट्रीय सूलमउ संस्थान (निम्समे) लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के संवर्धन, विकास और आधुनिकीकरण के लिए एक प्रमुख संस्थान है। संस्थान प्रशिक्षण, परामर्श सेवा, अनुसंधान और शिक्षा, विस्तार तथा सूचना सेवाओं की प्रचालन रेंज के माध्यम से अपने उद्देश्योंे को प्राप्त करने का प्रयास करता है।

एमगिरी - महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान

महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान को मगनवाड़ी, वर्धा की ऐतिहासिक परिसर में केवीआईसी और आईआईटी, दिल्ली के सामूहिक प्रयासों से स्थापित किया गया है। संस्थान देश में ग्रामीण औद्योगीकरण की प्रक्रिया की सहायता, उन्नयन तथा बढ़ावा देने पर विचार करता है।

सूलमउ वर्चुअल क्लस्टर

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम नये विचारों को विकसित करने में सर्वाधिक बहुफलदायक रोजगार सृजनकर्ता एवं अग्रणी हैं। सूलमउ मंत्रालय की इच्छा ”वर्चुअल क्लस्टर“ अवधारणा से भौगोलिक रूप से फैले स्थानों में स्थित व्यवसायों की सहायता करने की है।
28450 उद्योग
510 शैक्षिक संस्थान
184 डोमेन विशेषज्ञ

उद्योग आधार (यूए)

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में जिला उद्योग केन्द्र (डीआईसी) में उद्यम का पंजीकरण कराने का प्रावधान है। ऐसे पंजीकरण के लिए डीआईसी में अब उद्योग आधार ज्ञापन (यूएएम) को ईएमI तथा ईएमI फाइलिंग के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया है। यूएएम को दिनांक 18.09.15 की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार udyogaahaar.gov.in पर फाइल किया जा सकता है।

एस्पायर

ग्रामीण आजीविका इंक्यूबेटर, प्रौद्योगिकी व्यवसाय इंक्यूबेटर तथा निधियों के कोष के माध्यम से नवप्रवर्तन एवं ग्रामीण उद्यमिता को संवर्धित करने, नवप्रवर्तन, उद्यमिता एवं कृषि उद्योग को संवर्धित करने के लिए प्रौद्योगिकी केन्द्र नेटवर्क स्थापित करने के लिए मैं 200 करोड़ रूपए का समग्र निधि स्थापित करने का प्रस्ताव करता हूँ।
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ऑनलाइन आवेदन


परंपरागत उद्योगों के पुनर्सृजन के लिए निधि स्कीम (स्फूर्ति)

परंपरागत उद्योगों एवं कारीगर क्लस्टरों को संगठित कर परंपरागत उद्योगों को अधिक उत्पादक एवं प्रतिस्पर्धी बनाना।
ऑनलाइन आवेदन

एमएसएमई इंटरनेट शिकायत मॉनीटरिंग पद्धति (आईजीएमएस) के लिए स्वागत

एमएसएमईआईजीएमएस को आप जैसे लोगों द्वारा भेजी गई सभी शिकायतों एवं सुझावों की मॉनीटरिंग करने के लिए शुभारंभ किया गया है। यह शिकायतों/सुझावों की पद्धति को बहुत पारदर्शी बनाता है क्योंकि यह उस तारीख एवं समय को बताता है जिस दिन एवं तारीख को शिकायत प्राप्त हुई तथा जिस दिन एवं तारीख को शिकायत का समाधान किया गया।

माई एमएसएमई में आपका स्वागत

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र विगत छह दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के एक बेहद जीवंत और गतिशील क्षेत्र के रूप में उभर कर आया है। एमएसएमई न केवल बड़े उद्योगों की तुलना में अपेक्षाकृत कम पूँजी लागत पर रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करते हैं बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में भी मदद करने में अहम भूमिका निभाते हैं जिसके द्वारा क्षेत्रीय असंतुलन कम होता है और राष्ट्रीय आय एवं धन का अधिक समान वितरण सुनिश्चित होता है।



एमएसएमई इकाई बिलम्वित भुगतान की शिकायत के निवारण के लिए अपने राज्य के सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसएमई) से सम्पर्क कर सकती है।